---------------------------------------------------------

रविवार, 11 जुलाई 2021

चार पदारथ

    चार पदार्थ

         अध्यात्म, 
सूरत .निरत .शब्द .स्वांस, 
          कर्मरूप में, 
धर्म, अर्थ काम मोक्ष, 
          देहरूप में, 
मन .बुद्धि. चित .अहंकार, 
        वचनरूप में, 
सत्य, प्रेम, करुणा, सील,

ज्ञान वैराग्य प्रेम चिंतन

बुधवार, 28 अप्रैल 2021

साहेब कांशी राम जी

मेरा समाज निचोड़ कर फेंके नींबू के छिलके की तरह है- साहेब कांशी राम 



///////////////////////////////////////////////////////////////


पम्मी लालोमज़ारा (बंगा, नवांशहर) बात है 1991 की. लोकसभा के चुनावों के दौरान कुमारी मायावती को एक एस.पी. के थप्पड़ मारने के बदले में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने पोटा कानून लगाकर इलाहबाद की नैनी केन्द्रीय जेल में बंद कर दिया था. पंजाब के हरभजन सिंह लाखा भी उनके साथ ही जेल में बंद थे. कार्यकर्ताओं में मायूसी का आलम था. मायूसी के इस आलम को दूर करने के लिए साहेब ने दिल्ली में एक जागरूकता रैली का आयोजन किया. रैली के बाद कुछ कार्यकर्ता कंपनी बाग़ में रुक गए और साहेब उनके बीचोबीच बैठ गए. साहेब ने एक बिशन सिंह नाम के कार्यकर्ता को देखकर कहा ‘तुम्हें देखकर मुझे अपनी माँ (बिशन कौर) की याद आ जाती है.’ बिशन सिंह साहेब को कुछ कहना चाहता था तो साहेब ने ये बात भांप कर उसे पूछा, ‘क्या कहना चाहते हो? कहो!’ बिशन सिंह ने कहना शुरू किया, ‘साहेब जी, आप दिन रात इतनी मेहनत करते हो. लेकिन अपने समाज की बात आगे नहीं बढ़ रही. क्यों?’


साहेब ने पास में बैठे जय सिंह निगम को एक विक्रेता की और इशारा करते हुए कहा, ‘वो जो नींबू पानी बेचता है, उससे एक निचोड़े हुए नींबू का छिलका उठा के ला.’ साहेब ने जय सिंघ से वह नींबू का छिलका लेकर अपनी हथेली पर रख लिया और ऊपर से थोड़ा सा पानी डाला. फिर उसे मसला और और दो-तीन कार्यकर्ताओं के दो-चार बूँदें निचोड़ कर पूछा कि बताओ, इसमें किस चीज़ का स्वाद आ रहा है? सबने अपना एक मत जताते हुए कहा, ‘नींबू का स्वाद!’


साहेब ने थोड़ा आश्चर्य जताते हुए सवाल किया, ‘ये तो नींबू का छिलका था, इसमें तो जरा भी रस नहीं था. फिर इसमें नींबू का स्वाद भला कहाँ से आ गया?’


साहेब की बात पर सभी चुप रह गए. कोई कुछ न बोला. साहेब ने सबकी और देखा और बोलना शुरू किया, ‘अपना समाज भी दरअसल निचुड़े-सूखे नींबू की तरह है. इसपर आप थोड़ा सा पानी डालो, यानि सोये हुए समाज को जगाने की कोशिश करो, इसका स्वाद नींबू वाला ही आता है यानि समाज बहुजन समाज बन जाता है. मैं इस काम में दिन रात लगा हुआ हूँ. लेकिन हमारा समाज बहुत बड़ा है और उसे जगाने वाले लोग कम हैं. इसलिए मेरे समाज के लोगों को समझने में देर लग रही है.


( मैं कांशीराम बोल रहा हूं "किताब लेने के लिए संपर्क करें  9501143755 लेखक पंमी लाल़ो मजारा, बंगा-नवांशहर , पंजाब। )

गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

ग्रेट चमार महान विद्वान ज्ञानी दीत्त सिंह चमार

 सिख धर्म के सबसे महान विद्वान ज्ञानी दित्त सिंह चमार - ज्ञानी दित्त सिंह जी का जन्म 21 अप्रैल 1850 में गांव बस्सी पठाना , लाहौर पाकिस्तान में एक चमड़े का काम करने वाले चमार परिवार में हुआ जिनको सिख धर्म में रविदासिया सिख के नाम से जाना जाता है । अपनी प्राइमरी शिक्षा उन्होंने गुरबख्श सिंह और लाला दयानंद जी से गांव तिऊर , ज़िला अम्बाला , हरियाणा से प्राप्त की । इस दौरान उन्होंने उर्दू , गुरमुखि और फारसी भाषा में महारत हासिल की । 1881 में जब सिखों की गिनती सिर्फ 16 लाख रह गई थी तब इनके प्रचार की बदौलत ही सिखों की गिनती बढ़नी शुरू हुई थी , जब और धर्मों के लोग भी सिखी के साथ जुड़ना शुरू हो गए थे । 


👉 इन्होंने अपने 51 साल के जीवन में 70 से भी ज्यादा किताबें लिखी ।

👉 दुनिया के सबसे पहिले पंजाबी प्रोफेसर ।

👉 सिंह सभा लहर की संस्थापना और खालसा कालेज अमृतसर की संस्थापना इन्होंने ने की थी ।

👉 स्नातन धर्म के उस समय के सबसे बड़े विद्वान स्वामी दयानंद को 4 बार विचार चर्चा में हराया । 

👉 1873 में जब ईसाई मिशनरियों और आर्य समाज का प्रचार जोरों पर था और लोग सिख धर्म से दूर हो रहे थे तब दिन रात एक करके लोगों को सिख धर्म के साथ जोड़कर उसकी नींव मजबूत की ।

                              आखिर ये महान चमार  06-09-1901 को इस संसार को छोड़कर चला गया । अगर यह हीरा किसी और जाति का होता तो इसके नाम से कालेज , यूनिवर्सिटी आदि बनाई जाती , चमार होने की वजह से इनका ज़्यादा नाम नहीं लिया जाता । लेकिन हमें हमेशा इस बात का गर्व रहेगा सिख धर्म को जब सबसे बड़े मुश्किल समय से गुजरना पड़ रहा था तो उसको बचाने वाला हमारे महान चमार वंश का योद्धा था । चलो इस से हमें एक बहुत बड़ी सीख मिलती है कि किसी और धर्म के लिए अपना पूरा जीवन लगाने के बाद भी चमार विद्वान इतिहास के पन्नों में ही गुम होकर रह गए । तो हमें अपने आज़ाद रविदासिया धर्म का प्रचार करना चाहिए , गुरु रविदास जी की बानी पढ़कर उसमें नई-नई खोज करनी चाहिए । क्योंकि जिनका अपना धर्म नहीं होता उनका अच्छे से अच्छे इतिहास दूसरे धर्मों में मिश्रित होकर खत्म हो जाता है । जब तक कोई कौम अपने इतिहास के सुनहरी पन्नों में से प्रेरणा नहीं लेती तब तक उनमे नेतृत्व करने का जीतने का जज़्बा पैदा नहीं होता । इस लिए हमें अपने रविदासिया धर्म के साथ जुड़ना चाहिए ताकि हमारा इतिहास रविदासिया धर्म के अधीन लिखा जाए और आने वाली पीढियां उसको पढ़कर प्रेरणा लेकर ज़िन्दगी का हर मैदान फतिह ( जीत ) कर सकें ।

                                                        अभयदास जी देवबंद

बुधवार, 24 मार्च 2021

इस मिशन के 1000 संत 400 आश्रम चलाते है भारत में

                                 गुरु रविदास जी ने अपनी वाणी के में समझाया है




सतगुरु स्वामी समनदास महाराज जी का एक गुरु घर बन रहा है जो वर्ल्ड लेवल पर होगा ?
















                           गुरु रविदास जी ने अपनी वाणी के में समझाया है 

कि एक हंस एक समुद्र से दूसरे समुद्र की ओर जा ही रहा था कि उसे एक कुआं दिखता है. 


वह बहुत थक चुका था ,उसने सोचा कि क्यों ना यहां पर बैठ कर आराम कर लिया जाए. जिस कुएं के किनारे वह बैठता है उसी कुएं के अंदर एक मेंढक रहता है .


 उस कुए के अंदर जो मेंढक था उस मेंढक ने हंस को देखकर पूछा:- " मित्र तुम कौन हो और कहां से आए हो” ?


 हंस ने कहा :- " मैं पक्षी हूं समुद्र किनारे रहता हूं और मोती चुन कर कर खाता हूं .


 समुद्र का नाम सुनते ही मेंढक के मन में सवाल आया कि समुद्र कितना बड़ा है ?

      

 हंस ने जवाब दिया ;- ' बहुत बड़ा हैं !


मेंढक* ने थोड़ी दूर पीछे हट कर कहा कि इतना बड़ा होगा?


हंस ने कहा:-” नहीं मित्र, इससे बहुत बड़ा|”


मेंढक ने बड़ा सा चक्कर लगाकर पूछा:-‘ इतना बड़ा?’


 हंस ने हंसकर कहा की समुद्र , तो कुए से भी कहीं गुना बड़ा होता है !


तब मेंढक बोला:-” तू झूठ बोल रहा है, बेईमान है| इससे बड़ा तो हो ही नहीं सकता |”


हंस ने सोचा कि इस मुर्ख मेंढक को समझाने से अच्छा है कि यहां से चला जाए और हंस वहां से अपने समुद्र की ओर चल दिया|


 गुरु रविदास जी ने पूरे भारत और विदेशों में पैदल घूम घूम कर जन जाग्रति फैलाई इसी कारण उनके अनुयाई पूरे भारत के अलावा अन्य कई देशों में भी पाए जाते हैं 


 मनुष्य को बहुत सरल तरीके से समझाया था ठीक यही हाल हमारे समाज का है क्युकी ये लोग कभी किसी की बात को नहीं मानते क्युकी ये अपनी उस व्यवस्था से कभी बाहर ही नहीं निकलना चाहते ।


समाज को दिन दुनिया का पता कैसे चले बस विरोधी भाषा का प्रयोग करते है कभी किसी महापुरुष संत गुरु की बताई भाषा का चिंतन मनन नहीं करते ।


सिक्ख धर्म 300 साल पहले ही बना है वे लोग अपने गुरुओं की बातो को सुनकर पढ़कर मानकर दुनिया में फैले ओर अपने गुरुओं का नाम रोशन किया ,


लेकिन हमारे #चमार समाज में हजारों महारथी संत गुरु महापुरुष आए और इन्हे समझा कर चले गए यदि ये उनकी बाते मान लेते तो ये जो आज भी अपने रोने रोते रहते है इन्हे रोने की जरूरत ना पड़ती :- अगर इस समाज ने अपने गुरुओं को माना होता तो आज दुनिया में इनका भी सम्मान होता ।


लेकिन कहने को हम सबसे ज्यादा लेकिन सबसे बिखरे हुए हमारे लोग :- कोई ईसाई बन गया कोई सिक्ख बन गया कोई मुसलमान तो कोई बौद्ध , धर्म परिवर्तन की दलदल में गिरते चले गए लेकिन कभी अपने पूर्वजों के दर्शन को नहीं समझा ,


आज भी हमारे समाज में गुरु रविदास जी के लाखो संत सत्संग के माध्यम से समाज में जागृति फैला रहे है । 

#पंजाब #हरियाणा #उत्तरप्रदेश #उत्तराखंड आदि राज्यो में गुरुओं के डेरे आश्रमों से मिशन संत मिशन चला रहे है गुरुओं की वणियो से प्रचार करते है ,ओर मानव मानव का भेद ख़तम करके एक अखंड समाज का निर्माण के रहे है हम सभी को उनका सहयोग करना चहिए ।


अखिल भारतीय संत शिरोमणि सतगुरु रविदास मिशन 

गुरु गद्दी शुक्रताल अध्यक्ष व संस्थापक सतगुरु स्वामी #समनदास जी महाराज ?


इस मिशन के 1000 संत 400 आश्रम चलाते है भारत में ओर गाव गाव में सत्संग की साखा लगाकर गुरु रविदास जी की मूल विचारधारा का प्रचार करते है निगुरे लोगो को गुरु मुखी बना रहे है और मांस मदिरा का त्याग करा कर शाकाहारी सदाचारी जीवन जीने का मूल मंत्र दे रहे हैं ,सत्संग और परमार्थ करा रहे है ।


यह सभी कार्यक्रम सतगुरु स्वामी #समनदास महाराज जी के अध्यक्षता में होते हैं ?

सतगुरु स्वामी समनदास महाराज जी का एक गुरु घर बन रहा है जो वर्ल्ड लेवल पर होगा ?


                                उत्तर प्रदेश जिला मुजफ्फरनगर सुक्र्ताल एतिहासिक नगरी 

                       आज के समय में आपके बीच युगपुरुष जीती जागती तस्वीर है 

हमारे देश भारत में बहुत बड़े बड़े महापुरुष हुए हैं दो संसार में अपना नाम चमका कर गए और आज संसार उनका गुणगान करता है आज के समय में आपके बीच युगपुरुष जीती जागती तस्वीर है जिनका नाम पूरे भारत में वह संसार में प्रचलित हो गया है उनका नाम संत शिरोमणि सतगुरु समनदास जी महाराज के नाम से प्रचलित है सतगुरु स्वामी समनदास जी महाराज का संसार इस जन्म सन 1922 को भादो पूर्णिमा को हुआ ग्राम लाख जिला मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश में हुआ था उनका बचपन का नाम हुकमचंद था पिता का नाम श्री फूल सिंह व माता का नाम लक्ष्मी देवी था यह लाख में अपना सादा जीवन निर्वाह कर रहे थे चमार जाति में इनका जन्म हुआ चित्र साल पहले 1926 के हालात चमारों का हाल आप से छिपा नहीं है इतिहास गवाह है कैसे रहते थे हुकम चंद जी अपने माता-पिता के साथ खेतों में काम करवाते थे और काश कार के यहां धूप में यह बरसात में सभी ऋतु में काम करना पढ़ता था क्योंकि किसान के यहां काम करना बड़ा कठिन है और मात्र एक यही काम था कि जिसको ज्यादातर हमारे लोग करते थे जिस समय हुकुमचंद e10 11 वर्ष के थे तब खेत में एक पेड़ के नीचे दोपहर में बैठे हुए थे और उन्हें उस समय संसार की वस्तुओं में कोई दिलचस्पी नहीं थी वह सोचते रहते थे जैसे उन्हें कुछ प्राप्त करना हो इसी बीच उनके पास एक साधु आए और उन्होंने हुकुमचंद से पानी पीने के लिए मांगा तब हुकुमचंद बोले महाराज मैं चमार हूं मेरे हाथ से आप कैसे पानी पियोगे शादी बोले हुकुमचंद तुम कितने भोले हो तुम पानी पिलाओ हुकुमचंद जी घड़े में पानी लेकर आते हैं और सतगुरु समनदास जी महाराज पानी लेकर आते समय कुछ साधु को बड़े ध्यान से देखते हैं वह देखते हैं की एक ताकत पर बैठे और ताकत से नीचे तक उनके काले लंबे बाल लटक रहे हैं और चेहरे पर काले रंग की बड़ी-बड़ी दाढ़ी और चेहरे पर एक अजीब तेज चमक रहा है हुकम चंद जी ने देखा और हुकुम चंद जी मन ही मन में सोच रहे हैं यह सारी बातें कि इतनी धूप पड़ रही है और यह आसमान से कैसे नीचे आ गए यह जरूर कोई सिद्ध महात्मा है तब हुकुमचंद जी ने साधु को पानी पिलाया और पानी पीते पीते साधु महाराज से ज्ञान का उपदेश सुनाएं लगते हैं उनके अंदर ही सतगुरु अखंड ज्योति का स्वरूप दिखाया तभी से हुकुमचंद जी को अखंड ज्ञान हो गया जब मैं वहां से घर आए उन्हें संत की भांति ही बात कर रहे थे उन्होंने एकांत के लिए उपलों का धुना लगाया और धोना लगाकर कमरे में बैठ गए उनके घर वाले परेशान हो गए पिता फूल सिंह ने उन्हें काम करने को कहा परंतु हैं उनके भजन में मस्त है उन्होंने पिता फूल सिंह को विस्तार से समझाया परंतु मैं सोचने लगे कि इस पर किसी जादू टोने का असर हो गया है ऑपरेट प्रायर का मुझे लगता है उन्होंने एक सियाणा को बुलाया और उस सियाणा ने एक झाड़ू मंगाई और पिता फूल सिंह जी ने उसे झड़ लाकर दे दी वहां बहुत भीड़ हो गई लोग और काफी बच्चे पर औरतों भी थी और बहुत से डर के परेशान भी हो रहे थे कभी हुकुमचंद का पूरा हम पर ना आ जाए इसलिए लोग बाग डर भी रहे थे सियाणा ने जब झाड़ू को उठाया और उठाना चाहा चाहा तो सियाणा पर झाड़ू नहीं उठी और उसके हाथ आपस में चिपक गए उसने बहुत छुड़ाने की कोशिश की मगर उसके हाथ अपने हाथ से छूट नहीं रहे थे मानो किसी ने उसके हाथ रस्सी से जकड़ दिए हो दो दो आदमियों ने उसके हाथ छुड़ाने की कोशिश की मगर सियाणा हाथ नहीं छूटा सका तब सियाणा परेशान हो जाता है और महाराज जी से माफी मांगने लगते हैं कि है महाराज मुझे माफ कर दो आप जरूर कोई बड़ी शक्तियां तब हुकुम सिंह जी कहते हैं कि बता आज के बाद तो पागल नहीं बनाओगे लोगों का तब वह कहते हैं कि नहीं मैं पागल नहीं बनाऊंगा तब महाराज जी ने कहा खोल अपने हाथ तो उसने अपने आप को हाथ खोले और आप खुल गए सब सियाणा एक पल भी वहां नहीं रुका और भाग गया और इस बात का पर्चा पूरे गांव में आग की तरह फैल गया सभी को यह जानकारी हो गई की फूल सिंह के लड़के हुकुमचंद को कोई शक्ति मिल गई है तनु फूल सिंह जिस किसान के यहां लगे हुए थे वह किसान भी आता है और हुकम चंद जी को काम पर लौटने के लिए मनाने लगते हैं मगर हुकम चंद जी ने कहा कि मैं जिस काम के लिए आया हूं मुझे वह काम करना है तुम्हारा काम नहीं करना है इतनी बात सुनकर किसान को गुस्सा आ जाता है और वह फूल सिंह जी से कहते हैं कि तुम्हारा लड़का किसी काम का नहीं है और ना यह काम करेगा तुम मेरे ₹2000 दे दो बस मैं ऐसे काम पर नहीं ले जाता इतनी बात सुनकर हुकुमचंद जी बोले कि तुम अपनी चादर यहां बिचाओ मैं देता हूं तुम्हें पैसे तब हुकुम चंद जी ने जो उपले अपने धूणी मैं लगाए थे और उसके लाल लाल अंगारे हो रहे थे हुकुमचंद जी आग में से अंगारे निकाल निकाल कर उसकी चादर पर रखते गए और उनकी चादर पर रूपों का ढेर लग गया किसान यह करतब देख रहे थे सभी किसान को अपनी गलती पर पछतावा हुआ और वह हुकम चंद जी से माफी मांगने लगते हैं तब हुकुम संजू से कहते कि यह रुपया  लेऔर जाओ मगर किसान मगर किसान अपनी चादर और रुपए छोड़कर वहां से हाथ जोड़कर निकल जाते हैं हुकम चंद जी ने वह रुपए फिर वही रख दिया जहां से उन्होंने उठाता इस बात का चर्चा पूरे लाख गांव में जोर शोर से हो जाता हैl

        Abhay Das 

Deoband 9358190235



सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

एकलव्य कौन थे

 ।।सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर एकलव्य के अंगूठे का कत्ल।।



जब से भारतीय मूलनिवासी यूरेशियन के गुलाम हुए हैं, तभी से मूलभारतीयों, मूलनिवासियों और आदवंशियों के महापुरुषों को या तो कत्ल किया गया है या उन की विलक्षण प्रतिभा का भी नामो निशान मिटाया जाता आ रहा है। सम्राट शिव शंकर का मर्डर, शंबूक का कत्ल, रावण का छल से कत्ल, राजा बलि का हाथ बॉन्ध कर के कत्ल, एकलव्य की प्रतिभा का निशान मिटाने के लिए, उस के अंगूठे का कत्ल इतिहास आज तक भुला नहीं सका। 

एकलव्य कौन थे:---एकलव्य निषादराज का राजकुमार था, वनवासी तो तीर धनुष चलाने में, जन्मजात ही पारंगत होते हैं, फिर उन्हें कौन माई का लाल था, जो एकलव्य जैसे तीव्र बुद्धि के मालिक को तीर चलाना सीखा सकता था। वन में, एकलव्य धनुष चलाने का अभ्यास कर रहा था, जिसे द्रोणाचार्य का कुत्ता परेशान कर रहा था। एकलव्य ने, उस का मुंह तीरों से बन्द कर दिया था, जिसे देख कर द्रोणाचार्य सहित पांडव पुत्रों के होश उड़ गए थे, उन के पैरों तले मिट्टी खिसक गई, क्योंकि तीर कुत्ते के मुंह के अंदर घुस कर उस की जिह्वा को बंद कर बैठे थे, जैसा करना अर्जुन के वश का नहीं था। अर्जुन कुत्ते को देख कर, द्रोणाचार्य को गुस्से में कहने लगा, गुरु जी ! आप कहते थे कि आप से बड़ा कोई भी धनुर्धर नहीं होगा, कुत्ते को देख कर, आप को पसीना आ गया है, मेरे तो होश ही उड़ गए हैं, हम तो इन तीरों को देख कर ही, पशोपेश में पड़ गए हैं कि हमारा क्या होगा, हमारे पीछे तो पहले ही दुर्योदन पड़ा हुआ है।

द्रोणाचार्य ने, अर्जुन को ढाढस बंधाते हुए कहा, वत्स चिंता मत करो, जो हम करेंगे उस का आप को अनुमान नहीं है। सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर का ताज आप के ही मात्थे पर सजेगा। ये वनवासी आप के सामने आ ही नहीं सकेगा। देखते चलो हमारा चमत्कार। द्रोणाचार्य ने, अपनी ब्राह्मणवादी क्रूर चाल चली और अपनी मूर्ति बना कर, एकलव्य के अभ्यास स्थल पर स्थापित कर दी, दूसरे दिन द्रोणाचार्य भी अपने शिष्यों को लेकर, एकलव्य के शिक्षण स्थल पर पँहुच गया। छली द्रोणाचार्य ने एकलव्य को कहा, वत्स आप मेरी मूर्ति बना कर, मुझ से धनुर्धर विद्या सीख रहे हो, आप ने मुझे गुरु बना कर, मुझ से वीर धनुर्धर बनने का प्रयास किया है, तो फिर मुझे गुरु दक्षिणा क्यों नहीं देते हो ? एकलव्य ने द्रोणाचार्य को कहा, मैं कहाँ आप से धनुर्धर विद्या सीख रहा हूँ ? हम तो वनवासी लोग, आप लोगों से अधिक तीर चलाते हैं,हम आप से अधिक तीर चलाना जानते हैं, हम तो हररोज मार शिकार करते हैं, आप हमारे से मुकाबला कर के देख लो। क्रूर द्रोणाचार्य और पांडवों ने, जबरन एकलव्य को अकेला पा कर, उस का दहिने हाथ का अंगूठा काट दिया और प्रचारित कर दिया कि एकलव्य ने, स्वयं ही गुरु दक्षिणा में, अंगूठा काट कर देदिया। 

वास्तव में, मनुवादी हमेशा ऐसा ही छल करते आए हैं, वर्तमान में भी, मूलनिवासी, आदिवासी  प्रतिभासंपन्न युवाओं का भविष्य, इसी तरह ही समाप्त करते हैं। आज जितने बड़े बड़े पदों के लिए कंपीटीशन परीक्षाएं और प्रतियोगिताएं हो रही हैं, उन में मूलनिवासी युवा ही टॉप करते हैं, जिस के कारण ही, कांग्रेस और भाजपा आदि मनुवादी सरकारों ने, रोजगार देने के लिए ठेका प्रणाली शुरू कर रखी है ताकि ये ठेकेदार केवल मनुवादियों को ही नौकरियां दे कर, मूलनिवासी, मूलभारतीयों को बेकार रख सकें। मूलनिवासी राजनेताओं को, केवल एक ही राजनीतिक पार्टी बना कर, सत्ता छीनने का प्रयास करना चाहिए ताकि मूलनिवासी शासन स्थापित कर के न्याय पूर्वक भारतीयों को, एक समान अवसर उपलब्ध करवाए जा सकें।

रामसिंह आदवंशी।

अध्यक्ष।

विश्व आदधर्म मंडल।

Star Film 🎥

गुरु आदि परगास ग्रँथ के रचयिता स्वामी ईशरदास जी महाराज,

 ।।पंजाब विधानसभा सन 1937 के सदस्य।।


सन 1936-1937 में गुलाम भारतवर्ष में पहले विधानसभा चुनाव चुनाव हुए थे, जिस में साहिबे कलाम मंगू राम जी ने, चुनाव लड़ कर आदधर्म का परचम सारे विश्व में, लहराया था। वे इसी चुनाव में अछूतों को आरक्षण लागू करवाने में भी सफल हो गए थे। भारतवर्ष का संविधान तो 1947 में बनना श्रु हुआ था और लागू 1950 में हुआ था, मगर ये महाउपलब्धि परमपूज्य साहिबे कलामें मंगू राम मुगोवाल जी, गुरु आदि परगास ग्रँथ के रचयिता स्वामी ईशरदास जी महाराज, बीडीओ हजारा सिंह पिपलांवाला पंजाब और स्वामी अच्छूतानंद जी महाराज कानपुर उतर प्रदेश के


आंदोलनकारियों, प्रदर्शनकारियों की ही थी। पंजाब विधानसभा के 175 विधायकों के लिये चुनाव मार्च 1937 में हुए थे, जिन का विवरण निम्नलिखित है।


1 सर्व माननीय मेजर सरदार सर सिकन्दर हयात खान पश्चिम पंजाब।


2 सरदार बहादुर डॉक्टर सरदार सर सुंदर सिंह बटाला सिख ग्रामीण।


3 राव बहादुर चौधरी छोटू राम झझर सेंट्रल सामान्य ग्रामीण।


4 माननीय मिस्टर मनोहर लाल विश्वविद्यालय।


5 नबाबजादा मेजर मलिक खिजार हयात खान टिवाणा, खुशहाब मुहम्मदन ग्रामीण।


6 मियां अब्दुल हयात खान, दक्षिण पूर्व टाउन मोहम्मदन ग्रामीण।


7 श्रीमती रशीदा लातीफ, आंतरिक लाहौर मुहम्मदन स्त्री शहरी।


8 खान बहादुर नबाब मलिक अल्ला बख़्श खान , शाहपुर मुहम्मदन शहरी।


9 सरदार प्रताप सिंह, अमृतसर दक्षिण सिख ग्रामीण।


10 खान बहादुर नबाब मुजफ्फर खान, अटोक उतर, मुहम्मदन ग्रामीण।


11 सरदार मेजर मुहम्मद नबाज खान, अटोक सेंट्रल मुहम्मदन ग्रामीण।


12 सरदार सोहन सिंह जोश, अमृतसर सिख ग्रामीण।


13 चौधरी सर सहाबुद्दीन, सियालकोट दक्षिण मुहम्मदन ग्रामीण।


14 डॉक्टर मुहम्मद आलम, रावलपिंडी डिवीजन टाउन मुहम्मदन शहरी।


15 डॉक्टर शेफुद्दीन किचलू, अमृतसर शहर, मुहम्मदन शहरी।


16 शेख फैज मुहम्मद, डेरा गाजी खान, सेंट्रल मुहम्मदन ग्रामीण।


17 सरदार नरोत्तम सिंह, दक्षिण पूर्व पंजाब सिख ग्रामीण।


18 सरदार गोपाल सिंह, लुधियाना और फिरोजपुर सामान्य, आरक्षित सीट ग्रामीण।


19 चौधरी मुहम्मद यासीन खान, उतर पश्चिम गुड़गांव मुहम्मदन ग्रामीण।


20 राय साहिब चौधरी हेतराम, हिसार दक्षिण सामान्य, ग्रामीण।


21 श्री खालिद लतीफ गाऊबा, आंतरिक लाहौर, मुहम्मदन शहरी।


22 मलिक बरक़त अली, पूर्व टाउन मुहम्मदन शहरी।


23 मलिक हबीबुल्ला खान, सरगोदा मुहम्मदन ग्रामीण।


24 चाननसिंह, कसूर सिख ग्रामीण।


25 सरदार साहिब सरदार संतोख सिंह, पूर्व टाउन सिख शहरी।


26 सरदार कपूर सिंह, लुधियाना पूर्व सिख ग्रामीण।


27 चौधरी जल्लालूद्दीन अंबर, पश्चिम सेंट्रल पंजाब भारतीय क्रिश्चियन।


28 महंत प्रेम सिंह, गुजरात और शाहपुर सिख ग्रामीण।


29 सरदार मुजफ्फर अली खान, लाहौर मुहम्मदन ग्रामीण।


30 सरदार हरि सिंह, कांगड़ा और उत्तर होशियारपुर सिख ग्रामीण।


31 सरदार लालसिंह, लुधियाना सेंट्रल सिख ग्रामीण।


32 सरदार साहिब सरदार उज्जल सिंह, पश्चिम टाउन सिख शहरी।


33 डॉक्टर गोपी चन्द भार्गब, लाहौर शहर सामान्य शहरी।


34 प्रोफेसर डब्ल्यू रोबर्ट यूरोपियन।


35 लाला दुनी चन्द अंबाला और शिमला सामान्य ग्रामीण।


36 कैप्टन दीना नाथ, कांगड़ा दक्षिण सामान्य ग्रामीण।


37 मियां मुहम्मद इफ्तिखारूद्दीन, कौर मुहम्मदन ग्रामीण।


38 श्रीमती जहाँआरा शाह नबाज, आउटर लाहौर मुहम्मदन स्त्री शहरी।


39 लाला भीम सेन सच्चर, उतर पश्चिम टाउन सामान्य शहरी।


40 चौधरी कृष्णा गोपाल दत्त, उतर पूर्व टाउन सामान्य शहरी।


41 चौधरी टिक्का राम, रोहतक उतर सामान्य ग्रामीण।


42 शेख करामात अली, ननकाना साहिब मुहम्मदन ग्रामीण।


43 मास्टर काबुल सिंह, जालंधर पूर्व सिख ग्रामीण।


44 खान साहिब चौधरी रियासत अली, हफीजावाद मुहम्मदन ग्रामीण।


45 चौधरी मुहम्मद हसन,लुधियाना मुहम्मदन ग्रामीण।


46 राजा गजानफर अली खान, पिंड दादन खान मुहम्मदन ग्रामीण।


47 सरदार रूर सिंह, फिरोजपुर पूर्व सिख ग्रामीण।


48 चौधरी करतार सिंह, होशियारपुर पश्चिम।


49 टिक्का जगजीतसिंह बेदी, मुंटगुमरी पूर्व सिख ग्रामीण।


50 पंडित मुनी लाल कालिया, लुधियाना और फिरोजपुर सामान्य ग्रामीण।


51 नबाबजादा मुहम्मद फैज अली खान, करनाल मुहम्मदन ग्रामीण।


52 डॉक्टर संतराम सेठ, अमृतसर शहर सामान्य शहरी।


53 मखदूमजादा हाजी सियोद मोहम्मद रजा शाह जिल्लानी, सूजावाद मुहम्मदन ग्रामीण।


54 लाला सुदर्शन, पूर्वी टाउन सामान्य शहरी।


55 मौलवी गुलाम मौउद्दीन, शेखुपुरा मुहम्मदन ग्रामीण।


56 पंडित श्री राम शर्मा, दक्षिण टाउन सामान्य शहरी।


57 मीर मकबूल महमूद, अमृतसर मुहम्मदन ग्रामीण।


58 लाला भगत राम छोटा, जालंधर सामान्य ग्रामीण।


60 मिस्टर एस पी सिंघा, पूर्वी सेंट्रल पंजाब भारतीय क्रिश्चियन।


61 सरदार हरजाब सिंह, होशियारपुर दक्षिण सिख ग्रामीण।


62 श्रीमती रघुवीर कौर, अमृतसर सिख स्त्री।


63 सैयद अफजल अली हसन, शाहदरा मुहम्मदन ग्रामीण।


64 श्रीमती पार्वती जय चन्द, लाहौर शहर सामान्य स्त्री।


65 राय बहादुर मिस्टर मुकन्द लाल पुरी, रावलपिंडी डिवीजन सामान्य ग्रामीण।


66 डॉक्टर सर गोकल चन्द नारंग, पश्चिम लाहौर डिवीजन सामान्य ग्रामीण।


67 नबाब खान शाह नबाज खान, फिरोजपुर सेंट्रल मुहम्मदन ग्रामीण।


68 नबाब सर मलिक मुहम्मद हयात खान नूर, उतर पंजाब।


69 खान बहादुर नबाब चौधरी फैजल अली, गुजरात पूर्वी मुहम्मदन ग्रामीण।


70 मियां अब्दुल अजीज, आउटर लाहौर मुहम्मदन शहरी।


71 सरदार दसौंदा सिंह, जगराओं सिख ग्रामीण।


72 खान बहादुर नबाब सर मुहम्मद जमाल खान, लेघारि, तुमानदार।


73 राय साहिब लाल गोपाल दास, कांगड़ा उतर सामान्य ग्रामीण।


74 मिस्टर सी राय, अमृतसर सियालकोट सामान्य ग्रामीण।


75 राव बहादुर कैपटन राव बलवीर सिंह, उतर पश्चिम गुड़गांव सामान्य ग्रामीण।


76 खान बहादुर मियां अहमद यार खान दौलताना मैलसी मुहम्मदन ग्रामीण।


77 चौधरी फकीर खान, तरनतारन मुहम्मदन ग्रामीण।


78 खान बहादुर मिंयाँ मुस्ताक अहमद गुरमानी, मुजफ्फरगढ़ उतर मुहम्मदन ग्रामीण।


79 पीर अकबर अली शाह, फाजिलका  मुहम्मदन ग्रामीण।


80 सैयद मुबारक अली शाह, झांग सेंट्रल मुहम्मदन ग्रामीण।


81 खान हैबत खान दाहा, खानेबाल मुहम्मदन ग्रामीण।


82 चौधरी साहिब दाद खान, हिसार मुहम्मदन ग्रामीण।


83 मियां नुरुल्ला, लायलपुर मुहम्मदन ग्रामीण।


84 खुआजा गुलाम समंद, दक्षिण टाउन मुहम्मदन ग्रामीण।


85 राय बहादुर सरदार विशाखा सिंह, अमृतसर सेंट्रल सिख ग्रामीण।


86 भगत हंसराज, अमृतसर और सियालकोट सामान्य आरक्षित सीट ग्रामीण।


87 राय बहादुर बिंदा सारन, पंजाब कॉमर्स और उद्योग।


88 राय बहादुर लाला शाम लाल, पश्चिम मुल्तान डिवीजन सामान्य ग्रामीण।


89 महंत गिरधारी दास, दक्षिण पूर्वी मुल्तान डिवीजन सामान्य ग्रामीण।


90 सेठ राम नारायण अरोड़ा, लायलपुर और झांग सामान्य ग्रामीण।


91 ठाकुर रिपुदमन सिंह,गुरदासपुर सामान्य ग्रामीण। 


92 लाला शिव दयाल, दक्षिण पश्चिम टाउन सामान्य शहरी।


93 राय भगवंत सिंह, कांगड़ा पूर्व सामान्य ग्रामीण।


94 पीर मोयुद्दीन लाल बादशाह, अटोक दक्षिण मुहम्मदन ग्रामीण।


95 खान साहिब मिंयाँ नूर अहमद खान, दीपालपुर मुहम्मदन ग्रामीण।


96 सैयद अमजद अली शाह, फिरोजपुर पूर्व मुहम्मदन ग्रामीण।


97 चौधरी उमर हयात खान, भालबल मुहम्मदन ग्रामीण।


98 कैप्टन आशिक़ हुसैन, मुल्तान मुहम्मदन ग्रामीण।


99 खान साहिब राय शहादत खान, जारांवाला मुहम्मदन ग्रामीण।


100 खान बहादुर कैप्टन मलिक मुजफ्फर खान, मिंयाँवाली दक्षिण मुहम्मदन ग्रामीण।


101 खान साहिब चौधरी पीर मुहम्मद, दक्षिण पूर्व गुजरात मुहम्मदन ग्रामीण।


102 राजा मुहम्मद सरफ़राज़ खान, चकवाल मुहम्मदन ग्रामीण।


103 खान बहादुर मखदूम सैयद, मिझाम्मद हसन अलीपुर मुहम्मदन ग्रामीण।


104 खान बहादुर सरदार मुहम्मद हसन खान गुरचानी, डेरा गाजीखान दक्षिण मुहम्मदन ग्रामीण।


105 सरदार उत्तम सिंह दुग्गल, उतर पश्चिम पंजाब सिख ग्रामीण।


106 सेठ किशन दास, जालंधर सामान्य आरक्षित सीट ग्रामीण।


107 लाला सीता राम, ट्रेड यूनियन लेबर।


108 दीवान चमन लाल, पूर्व पंजाब नान यूनियन पंजाब।


109 राय साहिब लाला आत्मा राम, हिसार उतर सामान्य ग्रामीण।


110 मौलवी मझार अली आझार, उतर पूर्वी टाउन मुहम्मदन शहरी।


111 पंडित भगत राम, कांगड़ा पश्चिम सामान्य ग्रामीण।


112 ख्वाजा गुलाम हुसैन, मुल्तान डिवीजन टाउन, मुहम्मदन शहरी।


113 खान साहिब चौधरी फजलद्दीन, अजनाला मुहम्मदन ग्रामीण।


114 चौधरी मुहम्मद अब्दुल रहमान खान, जालंधर उतर मुहम्मदन ग्रामीण।


115 मिंयाँ फतेह मुहम्मद, गुजरात उतर, मुहम्मदन ग्रामीण।


116 मिंयाँ अहमद बख़्श खान, उतर पंजाब, नान यूनियन लेबर।


117 सरदार बलि मुहम्मद सियाल हिराज, कबीरवाला मुहम्मदन ग्रामीण।


118 चौधरी नसीरूद्दीन, गुजरांवाला उतर मुहम्मदन ग्रामीण।


119 सूबेदार मेजर फरमान अली खान, गुजर खान मुहम्मदन ग्रामीण।


120 खान बहादुर राजा मुहम्मद अकरम खान, झेलम मुहम्मदन ग्रामीण।


121 खान साहिब नबाब मुहम्मद सादात अली खान, समूँद्री मुहम्मदन ग्रामीण।


122 चौधरी अली अकबर, गुरदासपुर पूर्व मुहम्मदन ग्रामीण।


123 लियूटीनेंट सोढ़ी हरनाम सिंह, फिरोजपुर उतर सिख ग्रामीण।


124 खान साहिब चौधरी मुहम्मद सफी अली खान, रोहतक मुहम्मदन ग्रामीण।


125 सरदार अजीत सिंह, दक्षिण पश्चिम पंजाब सिख ग्रामीण।


126 चौधरी प्रेम सिंह, दक्षिण पूर्व गुड़गांव, सामान्य आरक्षित सीट ग्रामीण।


127 सरदार साहिब सरदार गुरबचन सिंह, जालंधर पश्चिम सिख ग्रामीण।


128 चौधरी अनन्त राम, करनाल दक्षिण सामान्य ग्रामीण।


129 चौधरी राम स्वरूप, रोहतक सेंट्रल सामान्य ग्रामीण।


130 सरदार मूला सिंह, होशियारपुर पश्चिम सामान्य आरक्षित सीट ग्रामीण।


131 मिंयाँ बद्दर मोयुद्दीन कादरी, बटाला मुहम्मदन ग्रामीण।


132 खान तालिब हुसैन खान, झांग पश्चिम मुहम्मदन ग्रामीण।


133 मखदूमजादा हाजी सैयद मुहम्मद बिलयात हुसैन जीलानी, लोधराम मुहम्मदन ग्रामीण।


134ख्वाजा गुलाम मुर्तज़ा, डेरा गाजीखान उतर मुहम्मदन ग्रामीण।


135 मिंयाँ अब्दुल राब, जालंधर दक्षिण मुहम्मदन ग्रामीण।


136 चौधरी मुहम्मद हुसैन, गुजरांवाला पूर्व मुहम्मदन ग्रामीण।


137 राणा नसरुल्ला खान, होशियारपुर पश्चिम मुहम्मदन ग्रामीण।


138 खान मुहम्मद यूसफ़ खान, रावलपिंडी सदर मुहम्मदन ग्रामीण।


139 सूफी अब्दुल हमीद खान, अंबाला और शिमला मुहम्मदन ग्रामीण।


140 पीर नसीरूद्दीन शाह, टोबा टेक सिंह मुहम्मदन ग्रामीण।


141 लाला हरनाम दास, लायलपुर और झांग सामान्य आरक्षित सीट ग्रामीण।


142 सरदार तारा सिंह, फिरोजपुर दक्षिण सिख ग्रामीण।


143 चौधरी जुगल किशोर, अंबाला और शिमला सामान्य आरक्षित सीट ग्रामीण।


144 सरदार प्रीतम सिंह, फिरोजपुर पश्चिम सिख ग्रामीण।


145 चौधरी फकीर चन्द, करनाल उतर सामान्य आरक्षित सीट ग्रामीण।


146 सरदार इंद्र सिंह, गुरदासपुर उतर सिख ग्रामीण।


147 राय हरि चन्द, ऊना सामान्य ग्रामीण।


148 लियूटीनेंट सरदार नौनिहाल सिंह मॉन, शेखुपुरा पश्चिम सिख ग्रामीण।


149 चौधरी रनपत, करनाल उतर सामान्य ग्रामीण।


150 राय फैज मुहम्मद खान, कांगड़ा और पूर्वी होशियारपुर मुहम्मदन ग्रामीण।


151राजा फतेह खान, रावलपिंडी पूर्व मुहम्मदन ग्रामीण।


152 चौधरी अब्दुल रहीम, शक्कर गढ़ मुहम्मदन ग्रामीण।


153 चौधरी मुहम्मद सरफ़राज़ खान, सियालकोट उतर मुहम्मदन ग्रामीण।


154 चौधरी अहमद यार खान, उतर पश्चिम गुजरात मुहम्मदन ग्रामीण।


155 चौधरी गुलाम रसूल, सियालकोट सेंट्रल मुहम्मदन ग्रामीण।


156 सरदार मुहम्मद हुसैन, चुनियन मुहम्मदन ग्रामीण।


157 चौधरी अब्दुल रहीम, दक्षिण पूर्वी गुड़गांव मुहम्मदन ग्रामीण।


158 मलिक फतेह शेर खान, मिंटगुमरी मुहम्मदन ग्रामीण।


159 खान साहिब गुलाम कादिर खान, मिंयाँवाली उटर मुहम्मदन ग्रामीण।


160 चौधरी जहांगीर खान, ओकरा मुहम्मदन ग्रामीण।


161 मिंयाँ फैजल करीम बख़्श, मुजफ्फरगढ़ सदर, मुहम्मदन ग्रामीण।


162 मिंयाँ सुल्तान महमूद हतियाना, पाक पाटन, मुहम्मदन ग्रामीण।


163 चौधरी मुहम्मद अशरफ, दक्षिण पश्चिम  गुजरात मुहम्मदन ग्रामीण।


164 सरदार बलवंत सिंह, सियालकोट सिख ग्रामीण।


165 चौधरी सुमेर सिंह, दक्षिण पूर्व गुड़गांव सामान्य ग्रामीण।


166 सरदार जोगिंद्र सिंह मॉन, गुजरांवाला और शाहदरा सिख ग्रामीण।


167 चौधरी सूरज मल, हांसी सामान्य ग्रामीण।


168 सरदार जगजीत सिंह मॉन, सेंट्रल पंजाब लैंड होल्डर।


सात व्यक्ति दो दो विधानसभाओं से चुने गए थे, जिन के खाली पड़े पद बाद में भरे गए थे

ABHEYDAS DeOBAND

                

सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

भारतवर्ष कैसे सोने की चिड़िया कहलाता है।

 


‌‍‌-------------------------------------
सबसे पहले भारत वर्ष का नाम जम्मू दीप था और आज जिसका नाम भारतवर्ष है वह एक टुकड़ा मात्र है जिसे आर्यवर्त भी कहते हैं जम्मू दीप में पहले देव असुर थे और बाद में कुरू वंश
और पूरू वंश लड़ाई मैं भारतवर्ष बहुत खंडों में बांटा आपस में झगड़े के कारण टुकड़ों में बट गया जम्मू दीप धरती के बीचो बीच है जम्मू दीप का विस्तार 100000 योजन है जम्मू दीप पर जामुन के अधिक पेड़ होने के कारण इस द्वीप का नाम जम्मू  द्वीप पड़ा था इसमें छह पर्वत है.
1.प्लक्ष
2.शाल्मली
3.कुश
4. क्रॉच
5.शाक्य
6. पुष्कर
पुराणानुसार पृथ्वी के ये नौ खंड या ये विभाग, भारत, इलावृत्त, किंपुरुष, भद्र, केतुमाल, हरि, हिरण्य, रम्य और कुश।समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं 
मच्छेल।यवन की लड़ाई के कारण भारत जम्मू दीप में शरण दिए जाने लगे यहां हिंदू और जम्मू देवासी की आपस के मेल ना खाने और अपना हिंदुत्व को बढ़ावा देने से सभी आपस में अलग-अलग बट गए और फिर बौद्ध काल में यह मान सम्मान की लड़ाई अपने चरम सीमा पर पहुंच गई तब चाणक्य की बुद्धि से चंद्रगुप्त मौर्य की समझ से ज्ञान से भारतवर्ष का संपूर्ण विस्तार दोबारा से किया गया चंद्रगुप्त जी सभी को एक छत्र के नीचे लाने में सफल हुए इनके बाद सम्राट अशोक के बाद बृह्धृत को धोखे से मार कर उनसे सत्ता कब जाएगी और जितना भारत में धन था वह सब लूट लिया गया।
नोट,-अगर लेख में कोई त्रुटि हो तो उसे सही लिखकर भेजें
अभय दास देवबंद